पटना। के नेतृत्व को लेकर के भीतर चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनकी कार्यशैली और संगठनात्मक सक्रियता पर सवाल उठाए हैं। यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है, जब भी मौजूद थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी दल में उत्तराधिकार मिलना और प्रभावी नेतृत्व स्थापित करना दो अलग-अलग बातें होती हैं। संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए शीर्ष नेतृत्व का कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच लगातार संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। पार्टी के भीतर यह आरोप भी सामने आया है कि तेजस्वी यादव कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए पर्याप्त रूप से सुलभ नहीं हैं। कुछ नेताओं का दावा है कि दूर-दराज से पटना आने वाले कार्यकर्ताओं को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन उन्हें तेजस्वी यादव से मुलाकात का अवसर नहीं मिल पाता। हालांकि, इन आरोपों पर तेजस्वी यादव या राजद नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। राजनीतिक हलकों में इसे संगठन के भीतर चल रही आंतरिक चर्चा के रूप में देखा जा रहा है।
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