जिले में इस साल समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, लेकिन अव्यवस्थाओं ने किसानों की मुश्किलें भी दोगुनी कर दीं। 2025 की तुलना में इस बार खरीदी करीब दोगुना हुई, फिर भी करीब 14 हजार किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए। सर्वर डाउन, स्लॉट बुकिंग की देरी और खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था के कारण हजारों किसानों को अब मंडी में कम दाम पर गेहूं बेचना पड़ेगा। 9 अप्रैल से शुरू हुई समर्थन मूल्य खरीदी गुरुवार को समाप्त हो गई। शाम 5 बजे तक जिले में 25 हजार 655 किसानों से 2 लाख 33 हजार 82 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका था। हालांकि कई केंद्रों पर देर शाम तक तुलाई जारी रही। खरीदी व्यवस्था पूरी तरह पुराने ढर्रे पर चलती रही। हालात ऐसे बने कि स्लॉट मिलने के बाद भी किसानों को 8 से 10 दिन तक ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर सड़क किनारे इंतजार करना पड़ा। केंद्रों पर भीड़ बढ़ती गई और तुलाई की रफ्तार धीमी पड़ती गई। वेयरहाउस और खरीदी केंद्रों में जगह कम पड़ने लगी तो गेहूं खुले में तौलना पड़ा। माल समय पर गोदामों तक नहीं पहुंचा तो भुगतान भी अटक गया। विभाग को कुल 600 करोड़ रुपए किसानों को देना था, लेकिन अब तक सिर्फ 430 करोड़ रुपए का भुगतान हो पाया है। करीब 170 करोड़ रुपए अब भी अटके हुए हैं। 90% माल शिफ्ट किया, 10 % परिवहन जारी ^28 मई खरीदी की अंतिम तारीख थी। जिले में 2 लाख 33 हजार 82 मीट्रिक टन खरीदी हुई है। कुछ किसानों की तुलाई जारी है। 90 प्रतिशत माल शिफ्ट किया जा चुका है, जबकि 10 प्रतिशत माल का परिवहन जारी है। -श्रीराम बरड़े, जिला आपूर्ति अधिकारी
ONLY AVAILABLE IN PAID PLANS